रविवार, 31 जुलाई 2022

Hariyali Teej Aarti | हरियाली तीज आरती

 

parvati aarti
शिव पार्वती 

 ॐ जय पार्वती माता, 

मैया जय पार्वती माता।। 

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता।।  

ॐ जय पार्वती माता।। 


अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता।

जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। 

ॐ जय पार्वती माता।।


सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा।

देव वधु जस गावत नृत्य कर ताथा।। 

ॐ जय पार्वती माता।।


सतयुग शील सुन्दर नाम सती कहलाता।।

हेमांचल घर जन्मी सखियाँ रंगराता। 

ॐ जय पार्वती माता।।


शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्थाता ।

सहस्त्र  भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।।

 ॐ जय पार्वती माता।।


सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता।

नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता। 

ॐ जय पार्वती माता।।


देवन अरज करत तव  चित को लाता।

गावत दे दे ताली मन में रंगराता।।

 ॐ जय पार्वती माता।।


श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता।

सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।। 

ॐ जय पार्वती माता।।

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maa parvati aarti | माँ पार्वती आरती

parvati aarti
शिव पार्वती 
a
 ॐ जय पार्वती माता,  

मैया जय पार्वती माता।।

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता।।  

ॐ जय पार्वती माता।। 


अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता।

जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। 

ॐ जय पार्वती माता।।


सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा।

देव वधु जस गावत नृत्य कर ताथा।। 

ॐ जय पार्वती माता।।


सतयुग शील सुन्दर नाम सती कहलाता।।

हेमांचल घर जन्मी सखियाँ रंगराता। 

ॐ जय पार्वती माता।।


शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्थाता ।

सहस्त्र  भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।।

 ॐ जय पार्वती माता।।


सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता।

नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता। 

ॐ जय पार्वती माता।।


देवन अरज करत तव  चित को लाता।

गावत दे दे ताली मन में रंगराता।।

 ॐ जय पार्वती माता।।


श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता।

सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।। 

ॐ जय पार्वती माता।।

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hariyali teej vrat katha aur pujan vidhi | हरियाली तीज व्रत कथा और पूजन विधि

 
hariyaali teej vrat katha
शिव पार्वती 


हरयाली तीज हिन्दुओं का प्रसिद्ध पर्व  है यह पर्व शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है।  इसकी कथा कुछ इस प्रकार है :- 

हरियाली तीज की पौराणिक व्रत कथा  :- 

क समय की बात है जब माता पार्वती अपने पूर्वजन्म के बारे में याद करना चाहती थीं लेकिन उन्हें कुछ याद नहीं आ रहा था। ऐसे में भोलेनाथ देवी पार्वती से कहते है की हे पार्वती तुमने मुझे प्राप्त करने के लिए 107  बार जन्म लिया था लेकिन तुम मुझे पति के रूप में पा न सकी।  पर 108  वे जन्म में पर्वतराज हिमालय और मेना  के घर जन्म लिया और मुझे वर रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की। 

भगवान शिव ने आगे बताया की हे पार्वती ! तुमने मुझे पाने के लिए घोर तपस्या की अन्न -जल का त्यागकर पत्ते खाए और सर्दी -गर्मी हर वातावरण में हजारों कष्टों को सहकर भी अपने व्रत का पालन किया।  तुम्हारे कष्टों को देखकर तुम्हारे पिताजी बहुत दुखी थे, तब नारद मुनि तुम्हारे घर पधारे और कहाँ की मुझे भगवान विष्णु ने भेजा है।  भगवान विष्णु आपकी कन्या से अत्यंत प्रसन्न है तथा वह उनसे विवाह करना चाहते है, और में भगवान विष्णु जी का यही सन्देश लेकर आपके पास आया हूँ। 

नारदजी के प्रस्ताव को सुनकर पार्वती के पिता ख़ुशी से भगवान विष्णु के साथ विवाह के लिए तैयार हो गए।  नारदमुनि ने भी भगवान विष्णु को यह शुभ सन्देश सुना दिया।  लेकिन जब यह बात पार्वती को पता चली तब वह बहुत दुखी हुई।  पार्वती ने अपने मन की बात अपनी सखी को सुनाई।  तब सखी ने माता पार्वती को घने जंगल में छुपा दिया और माता पार्वती जंगल में एक गुफा में रेत से शिवलिंग बनाकर शिवजी की पूजा कर रही थी। जब पार्वती के गायब होने की खबर हिमालय को पता चली तब उन्होंने उन्हें चारों और ढूंढने लगे। 

तब शिवजी ने कहा , पार्वती ! इस प्रकार तुम्हारी पूजा से में बहुत प्रसन्न हुआ और तुम्हारी मनोकामना पूरी की।  जब हिमालयराज गुफा में पहुंचे तब तुमने अपने पिता को बताया की मैंने शिवजी को पतिरूप में चयन कर लिया है।  में आपके साथ केवल एक शर्त पर चलूंगी की आप मेरा विवाह भोलेनाथ से करवाने के लिए तैयार हो जाएँ।  तब हे पार्वती ! तुम्हारे पिताजी मान गए और विधि विधान सहित हमारा विवाह हुआ।  हे पार्वती ! तुम्हारे कठोर तप और व्रत से ही हमारा विवाह हो सका। 

भगवान शिव देवी पार्वती से कहते है , हे पार्वती  इस हरियाली तीज को जो भी निष्ठां के साथ व्रत करेगा , में उसको मनोवांछित फल प्रदान करूँगा।  उसे तुम जैसा अचल सुहाग का वरतदान प्राप्त हो। 


हरियाली तीज पूजा विधि :

हरियाली तीज के दिन विवाहित स्त्रियां अपने  दीर्घायु के लिए व्रत रखती है।  इस  के मायके से शृंगार का सामान और मिठाइयां  भेजी जाती है।  हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह घर के काम और स्न्नान करने के बाद सोलह शृंगार करके निर्जला व्रत रखती है।  इसके बाद माँ पार्वती और भगवान शिव की पूजा होती है।  


 पूजा के अंत में तीज की कथा सुनी जाती है।  कथा के समापन पर महिलाए माँ गोरी से पति की लम्बी उम्र की कामना करती है।  इसके बाद घर में उत्स्व मनाया जाता है और भजन व् लोक नृत्य किये जाते है।  इस दिन हरे  वस्त्र , हरी चुनरी  , हरा लहरिया , हरा श्रृंगार , मेहँदी , झूला - झूलने का भी चलन है। 


*----------------------------------जय माता पार्वती -----------------------------*





शनिवार, 30 जुलाई 2022

Shri Ram Aarti | श्री राम आरती

shri ram aarti
जय श्री राम 


 

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारुणम्। 

नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। 


कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।

पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।


श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारुणम्।

नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।


भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।

रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।


श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारुणम्।

नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।


सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।

आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।


श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारुणम्।

नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।


इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।

मम ह्रदय कंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।


श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारुणम्।

नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।


मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।

करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।


श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारुणम्।

नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।


एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।

तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।


श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारुणम्।

नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।


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annapurna mata aarti | अन्नपूर्णा माता आरती

 
annpurna aarti
माँ अन्नपूर्णा 

बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम । 


जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,

कहां उसे विश्राम । 

अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो,

लेत होत सब काम ॥


बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम ।


प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर,

कालान्तर तक नाम ।

सुर सुरों की रचना करती,

कहाँ कृष्ण कहाँ राम ॥


बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम ।


चूमहि चरण चतुर चतुरानन,

चारु चक्रधर श्याम ।

चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर,

शोभा लखहि ललाम ॥


बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम ।


देवि देव! दयनीय दशा में,

दया-दया तब नाम ।

त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल,

शरण रूप तब धाम ॥


बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम ।


श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या,

श्री क्लीं कमला काम ।

कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी,

वर दे तू निष्काम ॥


बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम ।


-------------माता अन्नपूर्णा की जय-------------

ashutosh shushank shekhar | आशुतोष शशाँक शेखर

 
ashutosh shushank shekhar
ॐ नमः शिवाय

आशुतोष शशाँक शेखर,

चन्द्र मौली चिदंबरा,

कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,

कोटि नमन दिगम्बरा ॥


निर्विकार ओमकार अविनाशी,

तुम्ही देवाधि देव,

जगत सर्जक प्रलय करता,

शिवम सत्यम सुंदरा ॥


निरंकार स्वरूप कालेश्वर,

महा योगीश्वरा,

दयानिधि दानिश्वर जय,

जटाधार अभयंकरा ॥


शूल पानी त्रिशूल धारी,

औगड़ी बाघम्बरी,

जय महेश त्रिलोचनाय,

विश्वनाथ विशम्भरा ॥


नाथ नागेश्वर हरो हर,

पाप शाप अभिशाप तम,

महादेव महान भोले,

सदा शिव शिव संकरा ॥


जगत पति अनुरकती भक्ति,

सदैव तेरे चरण हो,

क्षमा हो अपराध सब,

जय जयति जगदीश्वरा ॥ ,


जनम जीवन जगत का,

संताप ताप मिटे सभी,

ओम नमः शिवाय मन,

जपता रहे पञ्चाक्षरा ॥


आशुतोष शशाँक शेखर,

चन्द्र मौली चिदंबरा,

कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,

कोटि नमन दिगम्बरा ॥


*-------------------*ॐ नमः शिवाय ----------------------*

shri krishan aarti | आरती कुञ्ज बिहारी की

 

shri krishan aarti
श्री कृष्ण 

आरती कुंज बिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


गले में बैजंती माला,

बजावे मुरली मधुर बाला,

श्रवण में कुंडल झलकाला,

नन्द के आनंद नन्दलाला,

गगन सम अंग कांति काली,

राधिका चमक रही आली,

लटन में ठाढ़े बनमाली,

भ्रमर सो अलक, कस्तूरी तिलक,

चन्द्र सी झलक,

ललित छवि श्यामा प्यारी की,

श्रीगिरीधर कृष्ण मुरारी की,


आरती कुंज बिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, 


कनकमय मोर मुकुट बिलसे,

देवता दर्शन को तरसे,

गगन सो सुमन रासी बरसे,


बजे मुरचंग,

मधुर मिरदंग,

ग्वालिन संग,


अतुल रति गोप कुमारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


आरती कुंज बिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


जहाँ ते प्रकट भई गंगा,

सकल मल हरिणी श्री गंगा,

स्मरण से होत मोह भंगा,

बसी शिव शीष, जटा के बीच,

हरे अघ कीच,


चरण छवि श्री बनवारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, ,


आरती कुंज बिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


चमकती उज्जवल तट रेणु,

बज रही वृन्दावन बेणु,

चहूँ दिशी गोपी ग्वाल धेनु,


हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटक भव फंद,


टेर सुन दीन भिखारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


आरती कुंज बिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


*--------------------जय श्री कृष्ण -------------------*

शुक्रवार, 29 जुलाई 2022

Santoshi Mata Aarti | संतोषी माता आरती

santoshi mata aarti
संतोषी माता

ॐ जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ।
अपने सेवक जन की,
सुख सम्पति दाता ॥

ॐ जय  सन्तोषी माता,

सुन्दर चीर सुनहरी,
मां धारण कीन्हो ।
हीरा पन्ना दमके,
तन श्रृंगार लीन्हो ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

गेरू लाल छटा छबि,
बदन कमल सोहे ।
मंद हंसत करुणामयी,
त्रिभुवन जन मोहे ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

स्वर्ण सिंहासन बैठी,
चंवर धुरे प्यारे ।
धूप, दीप, मधु, मेवा,
भोज धरे न्यारे ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

गुड़ अरु चना परम प्रिय,
तामें संतोष कियो ।
संतोषी कहलाई,
भक्तन वैभव दियो ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

शुक्रवार प्रिय मानत,
आज दिवस सोही ।
भक्त मंडली छाई,
कथा सुनत मोही ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

मंदिर जग मग ज्योति,
मंगल ध्वनि छाई ।
विनय करें हम सेवक,
चरनन सिर नाई ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

भक्ति भावमय पूजा,
अंगीकृत कीजै ।
जो मन बसे हमारे,
इच्छित फल दीजै ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

दुखी दारिद्री रोगी,
संकट मुक्त किए ।
बहु धन धान्य भरे घर,
सुख सौभाग्य दिए ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

ध्यान धरे जो तेरा,
मन वांछित फल पायो ।
पूजा कथा श्रवण कर,
घर आनन्द आयो ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

शरण गहे की लज्जा,
रखियो जगदम्बे ।
संकट तू ही निवारे,
दयामयी अम्बे ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

शुक्रवार प्रिय मान ती ,
मैया आज दिवस सोहे | 
भक्त मण्डली छायी ,
कथा सुनत मोहे | 

ॐ जय सन्तोषी माता,

सन्तोषी माता की आरती,
जो कोई जन गावे ।
रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति,
जी भर के पावे ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

मैया जय सन्तोषी माता ।
अपने सेवक जन की,
सुख सम्पति दाता ॥

ॐ जय सन्तोषी माता,

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Sheetla Mata Aarti | शीतला माता आरती

shitla mata aarti
शीतला माता

जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।  
आदि ज्योति महारानी,
सब फल की दाता ॥

ॐ जय शीतला माता..॥

रतन सिंहासन शोभित,
श्वेत छत्र भाता ।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलावें,
जगमग छवि छाता ॥

ॐ जय शीतला माता,

विष्णु सेवत ठाढ़े,
सेवें शिव धाता ।
वेद पुराण वरणत,
पार नहीं पाता ॥

ॐ जय शीतला माता,

इन्द्र मृदङ्ग बजावत,
चन्द्र वीणा हाथा ।
सूरज ताल बजावै,
नारद मुनि गाता ॥

ॐ जय शीतला माता,

घण्टा शंख शहनाई,
बाजै मन भाता ।
करै भक्तजन आरती,
लखि लखि हर्षाता ॥

ॐ जय शीतला माता,

ब्रह्म रूप वरदानी,
तुही तीन काल ज्ञाता ।
भक्तन को सुख देती,
मातु पिता भ्राता ॥

ॐ जय शीतला माता,

जो जन ध्यान लगावे,
प्रेम शक्ति पाता ।
सकल मनोरथ पावे,
भवनिधि तर जाता ॥

ॐ जय शीतला माता,

रोगों से जो पीड़ित,
शरण तेरी आता ।
कोढ़ी पावे निर्मल काया,
अन्ध नेत्र पाता ॥

ॐ जय शीतला माता,

बांझ पुत्र को पावे,
दारिद्र कट जाता ।
ताको भजै जो नाहीं,
सिर धुनि पछताता ॥

ॐ जय शीतला माता,

शीतल करती जननी,
तू ही है जग त्राता ।
उत्पत्ति बाधा वि नाशन,
तू सब की माता ॥

ॐ जय शीतला माता, ।

दास नारायण माँ के
कर जोरि माता ।
भक्ति आपनी दीजै,
और न कुछ भाता ॥


ॐ जय शीतला माता,

जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
आदि ज्योति महारानी,
सब फल की दाता ॥

ॐ जय शीतला माता

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Baba ramdev aarti | श्री रामदेव जी की आरती

 
baba ramdev peer
बाबा रामदेव जी 

चार घुंटीयो रे चौदह भवन में , हो रही जे जे कारि  
जग मग जग मग जोता जागे जे हो निजा धारि 

पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।

घर अजमल अवतार लियो

लाछां सुगणा करे थारी आरती। 

हरजी भाटी चंवर ढोले।

बैकुण्ठा में बाबा होवे थारी आरती।


गंगा रे  जमुना बहे सरस्वती।

जथे बाबो  रामदेव स्नान करे।

लाछां सुगणा करे थारी आरती।

हरिजीरी  भाटी चंवर ढोले।

बैकुण्ठा में बाबा होवे थारी आरती।


वीणा रे तंदुरो धणी रे नौबत बाजे

झालर रि झंकार पड़े 

लाछां सुगणा करे थारी आरती।

हरजी भाटी चंवर ढोले।

बैकुण्ठा में बाबा होवे थारी आरती। 


घिरत मिठाई बाबा चढे थारे चूरमो

धूपारी महकार पङे

लाछां सुगणा करे थारी आरती।

हरजी भाटी चंवर ढोले।

बैकुण्ठा में बाबा होवे थारी आरती। 

 

ढोल नगाङा बाबा नोबत बाजे

झालर री झणकार पङे

लाछां सुगणा करे थारी आरती।

हरजी भाटी चंवर ढोले।

पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।



 

दुरां रे देशां रा बाबा आवे थारे जात्री 

दरगा आगे बाबा नीवण करे।

लाछां सुगणा करे थारी आरती।

हरजी भाटी चंवर ढोले।

बैकुण्ठा में बाबा होवे थारी आरती। 



 

हरि शरणों में भाटी हरजी बोले 

नवो रे खंडो में , निशान धुरे 

लाछां सुगणा करे थारी आरती।

हरजी भाटी चंवर ढोले।

पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।


पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।

घर अजमल अवतार लियो

लाछां सुगणा करे थारी आरती। 

हरजी भाटी चंवर ढोले।

बैकुण्ठा में बाबा होवे थारी आरती।


-------------जै बाबा रामदेव्----------------


*यदि आरती में कोई भूल चूक या त्रुटि हो गयी हो तो भक्त समझ कर शमा करे और कमेंट में जरूर बताये।  

गुरुवार, 28 जुलाई 2022

Kaali mata aarti | काली माता आरती

kaali mata aarti
काली माता 


अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली ।

तेरे ही गुण गाये भारती

,

ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


तेरे भक्त जनो पे माता ,

भीर पडी है  ।

दानव दल पर टूट पडो,

माँ करके सिंह सवारी ।


सौ-सौ सिंहो से भी बलशाली,

हे अष्ट भुजाओ वाली,

दुष्टो को पलमे संहारती ।


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली ।

तेरे ही गुण गाये भारती,


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


माँ बेटे का है इस जग मे,

बडा ही निर्मल नाता ।


पूत - कपूत सुने है पर न,

माता सुनी कुमाता ॥

सब पे करूणा दरशाने वाली,

अमृत बरसाने वाली,

दुखियो के दुखडे निवारती ।


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली ।

तेरे ही गुण गाये भारती,


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


नही मांगते धन और दौलत,

न चांदी न सोना ।

हम तो मांगे माँ तेरे मन मे,

इक छोटा सा कोना ॥


सबकी बिगडी बनाने वाली,

लाज बचाने वाली,

सतियो के सत को सवांरती ।


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली ।

तेरे ही गुण गाये भारती,


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


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chhathi maiya aarti | छठी मैया आरती

 

chhathi aarti
सूर्य देव 

जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥

जय छठी मैया ॥ 


ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥

जय छठी मैया ॥


मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

जय छठी मैया ॥


अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥

जय छठी मैया ॥


ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥ 

जय छठी मैया ॥


मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

जय छठी मैया ॥


ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥

जय छठी मैया ॥


ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥

जय छठी मैया ॥


मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

जय छठी मैया ॥ 

सोमवार, 25 जुलाई 2022

bua baba ji di aarti ( punjabi ) | ਬੁਆ ਬਾਬਾ ਜੀ ਦੀ ਆਰਤੀ

jhiri mela bua bawa ji aarti
ਜੇ ਬਾਬਾ ਜੀਤਮਲ ਜੀ , ਜੇ ਬੁਆ ਕੌੜੀ ਜੀ

ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ , ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ ,
ਨਿਸ ਦਿਨ ਜੋਤ ਜਗਾਕੇ , ਤੈਨੂੰ ਮੈ ਧਿਆਵਾ। 
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ ,


ਵਿਚ ਝਿੜੀ ਅਸਥਾਨ ਹੈ ਤੇਰਾ ਮੇਲਾ ਲਗੇ ਭਾਰੀ ,
ਦਰਸ਼ਨ ਲਈ ਔਥੇ ਜਾਂਦੇ ਲੱਖਾਂ ਨਰ - ਨਾਰੀ |
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ ,

ਕਰ ਇਸ਼ਨਾਨ ਤਲਾ ਵਿਚ , ਕਸ਼ਟ ਮਿਟੇ ਸਾਰਾ ,
ਤੇਰੇ ਤਾਲਾਬ ਦੀ ਮਹਿਮਾ , ਜਾੜੇ ਜਗ ਸਾਰਾ |
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ ,

ਭੂਤ ਚੁੜੇਲ  ਵੀ ਤੈਥੋਂ ਮੰਗਦੇ ਨੇ ਛੁਟਕਾਰਾ,
ਮਾਫ ਕਰਿ ਸਾਨੂੰ ਬਾਵਾ , ਮਾਫ ਕਰਿ ਸਾਨੂੰ ਬੁਆ ਚਲਦਾ ਨਹੀਂ ਚਾਰਾ। 
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ ,

ਕੌੜੀ ਨੂੰ ਦੇਵੇ ਕਾਯਾ ਨਿਰਧਨ ਨੂੰ ਮਾਯਾ ,
ਅਨਿਆਂ ਨੂੰ ਦੇਵੇ ਅੱਖੀਂਆਂ , ਗੁੰਗੇਯਾ ਯਸ਼ ਗਯਾ। 
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ। 

ਮਾਵਾਂ ਨੂੰ ਬਚੜੇ ਦੇਵੇ , ਭੈਣਾਂ ਨੂੰ ਵੀਰ ਮਿਲੇ ,
ਜੇਹੜਾ ਦਰ ਤੇਰੇ ਆਵੇ , ਆਸਾਂ  ਦੇ ਫੁੱਲ ਖਿਲੇ। 
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ ,

ਖੇਨੂੰ ਗੁਡੀਆਂ ਲੈ ਕੇ ਸੰਗਤ ਦਰ ਆਵੇ ,
ਕਰ ਦੇਵੇ ਤੂੰ ਕ੍ਰਿਪਾ ਝੋਲੀਆਂ ਭਰ ਜਾਵੇ। 
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਵਾ,

ਦਵਾਰ ਤੇਰੇ ਦੇ ਚੇਲੇ ਚੌਂਕੀਆਂ ਨੇ ਭਰਦੇ ,
ਨਾਮ ਤੇਰੇ ਨੂੰ ਜਪ ਕੇ ਪਾਪੀ ਨੇ ਹਾਰਦੇ। 
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ ,

ਇਸ ਕਲਯੁਗ ਦੇ ਅੰਦਰ ਹੇ  ਅਵਤਾਰ ਤੇਰਾ ,
ਹਰ ਇਕ ਜੀਵ ਤੇ ਬਾਵਾ , ਹਰ ਇਕ ਜੀਵ ਤੇ ਬੁਆ ਹੇ ਉਪਕਾਰ ਤੇਰਾ। 
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਵਾ ,

ਧੂੜ ਤੇਰੇ ਚਰਣਾ ਦੀ ਝੋਲੀ ਵਿਚ ਪਾਂਵਾਂ ,
ਨਾਮ ਦਾ ਅਮ੍ਰਤ ਪੀ ਕੇ ਤੇਰਾ ਯਸ਼ ਗਾਂਵਾਂ।
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਵਾ,

ਧੁੱਪ ਦੀਪ ਤੇਰੀ ਆਰਤੀ , ਚੰਦਨ ਤਿਲਕ ਲਗੇ ,
ਪੁਸ਼ਪਾ ਦੀ ਗੱਲ ਮਾਲਾ ਖਿਚੜੀ ਭੋਗ ਲਗੇ। 
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਵਾ ,

ਹੱਥ ਜੋੜ ਕੇ ਅਰਜਾਂ  ਜਗ ਸਾਰਾ ਕਰਦਾ,
ਸਾਥੀ ਸੇਵਕ ਦਰਦਾ ਉਪਮਾ ਹੈ ਕਰਦਾ। 
ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਵਾ ,

ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ , ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ ,
ਨਿਸ ਦਿਨ ਜੋਤ ਜਗਾਕੇ , ਤੈਨੂੰ ਮੈ ਧਿਆਵਾ। 

ਸ਼੍ਰੀ ਜੇ ਬੁਆ ਬਾਬਾ। 


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रविवार, 24 जुलाई 2022

maa sarswati aarti | सरस्वती माता आरती

 श्री सरस्वती माता 

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। 

सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

ॐ जय सरस्वती माता


चंद्रवदनि पद्मासिनी, ध्रुति मंगलकारी।

सोहें शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ॥

ॐ जय सरस्वती माता


बाएं कर में वीणा, दाएं कर में माला।

शीश मुकुट मणी सोहें, गल मोतियन माला ॥ 

ॐ जय सरस्वती माता


देवी शरण जो आएं, उनका उद्धार किया।

पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥ 

ॐ जय सरस्वती माता


विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो।

मोह, अज्ञान, तिमिर का जग से नाश करो ॥ 

ॐ जय सरस्वती माता


धूप, दीप, फल, मेवा मां स्वीकार करो।

ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो ॥ 

ॐ जय सरस्वती माता


मां सरस्वती की आरती जो कोई जन गावें।

हितकारी, सुखकारी, ज्ञान भक्ती पावें ॥ 

ॐ जय सरस्वती माता


जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।

सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ 

ॐ जय सरस्वती माता


ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता ।

सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ 

ॐ जय सरस्वती माता


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yamuna aarti | यमुना आरती

 

yamuna aarti
श्री यमुना माता 

ॐ जय यमुना माता, हरि जय यमुना माता । 

जो नहावे फल पावे सुख दुःख की दाता ।।

ॐ जय यमुना माता


पावन श्री यमुना जल अगम बहै धारा ।

जो जन शरण में आया कर दिया निस्तारा ।।

ॐ जय यमुना माता


जो जन प्रातः ही उठकर नित्य स्नान करे ।

यम के त्रास न पावे जो नित्य ध्यान करे ।।

ॐ जय यमुना माता


कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही ।

तुम्हारा बड़ा महातम चारो वेद कही ।।

ॐ जय यमुना माता


आन तुम्हारे माता प्रभु अवतार लियो ।

नित्य निर्मल जल पीकर कंस को मार दियो ।।

ॐ जय यमुना माता


नमो मात भय हरणी शुभ मंगल करणी ।

मन बेचैन भया हैं तुम बिन वैतरणी ।।

ॐ जय यमुना माता


ॐ जय यमुना माता, हरि जय यमुना माता । 

जो नहावे फल पावे सुख दुःख की दाता ।।

ॐ जय यमुना माता

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शनिवार, 23 जुलाई 2022

GANGA AARTI | गंगा आरती

GANGA AARTI
माँ गंगा 


ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता । गंगा आरती 

जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥

॥ ॐ  जय गंगे माता..॥


चंद्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल आता ।

शरण पडें जो तेरी, सो नर तर जाता ॥

॥ ॐ  जय गंगे माता..॥


पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता ।

कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥

॥ ॐ  जय गंगे माता..॥


एक ही बार जो तेरी, शारणागति आता ।

यम की त्रास मिटा कर, परमगति पाता ॥

॥ ॐ  जय गंगे माता..॥


आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता ।

दास वही सहज में, मुक्त्ति को पाता ॥

॥ ॐ जय गंगे माता..॥


ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।

जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥

ॐ  श्री जय गंगे माता ।

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Vishwakarma aarti | विश्वकर्मा आरती

vishvkarma aati
श्री विश्वकर्मा

 जय श्री विश्वकर्मा ,

प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

सकल सृष्टि के करता,

रक्षक स्तुति धर्मा ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


आदि सृष्टि मे विधि को,

श्रुति उपदेश दिया ।

जीव मात्र का जग में,

ज्ञान विकास किया ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


ऋषि अंगीरा तप से,

शांति नहीं पाई ।

ध्यान किया जब प्रभु का,

सकल सिद्धि आई ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


रोग ग्रस्त राजा ने,

जब आश्रय लीना ।

संकट मोचन बनकर,

दूर दुःखा कीना ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


जब रथकार दंपति,

तुम्हारी टेर करी ।

सुनकर दीन प्रार्थना,

विपत सगरी हरी ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


एकानन चतुरानन,

पंचानन राजे।

त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,

सकल रूप साजे ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


ध्यान धरे तब पद का,

सकल सिद्धि आवे ।

मन द्विविधा मिट जावे,

अटल शक्ति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


श्री विश्वकर्मा की आरती,

जो कोई गावे ।

भजत गजानांद स्वामी,

सुख संपति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा ,


प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

सकल सृष्टि के करता,

रक्षक स्तुति धर्मा ॥

जय श्री विश्वकर्मा ||


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शुक्रवार, 22 जुलाई 2022

भगवान शिव की आरती | Shiv aarti

 

shiv aarti
ॐ नमः शिवाय 

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। 

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

ओम जय शिव ओंकारा॥



एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। 

हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥




दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। 

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी। 

त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे। 

सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी। 

सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। 

मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा। 

पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा। 

भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥

ओम जय शिव ओंकारा॥



जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला। 

शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी। 

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे। 

कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। 

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

ओम जय शिव ओंकारा॥

                                        
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shanidev aarti| शनिदेव आरती

शनिदेव आरती
शनिदेव


 जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥

॥ जय जय श्री शनिदेव..॥


श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।

नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥

॥ जय जय श्री शनिदेव..॥


क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।

मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥

॥ जय जय श्री शनिदेव..॥


मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥

॥ जय जय श्री शनिदेव..॥


देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी ।

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥

॥ जय जय श्री शनिदेव..॥


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Surya Dev Aarti | सूर्य देव आरती

SURYA DEV AARTI
सूर्य देव 

 ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।



सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।

अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।


ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।

फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।


संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।

गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।



देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।

स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।


तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।

प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।


भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।

वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।



पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।

ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।


ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।

धरत सब ही तव ध्यान, 

ॐ जय सूर्य भगवान।।


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Bua Baba ji ki aarti , बुआ बावा जी की आरती

Jhiri mela
बाबा जीतमल जी बुआ कौड़ी जी 


 श्री जय बुआ बावा , श्री जय बुआ बावा ,

निस दिन जोत जगाके , तैनू में ध्यावाँ ,

श्री जय बुआ बावा ,


विच झिड़ी अस्थान है तेरा मेला लगे भारी ,

दर्शन लई  ओथे जांदे लखां नर -नारी | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

कर इशनान तला विच , कष्ट मिटे सारा ,

तेरे तलाब दी महिमा , जाणे जग सारा | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

भुत  चुड़ैल वि तैथों मंगदे ने छुटकारा,

माफ़ करीं  सानू बावा , माफ़ करी सानू बुआ चलदा नहीं चारा | 

श्री जय बुआ बावा , 


कोड़ी नू  देवें काया निर्धन नू  माया ,

अनेयां नू देवें अखियां , गूंगेयां यश गया | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

मवाँ नू बचड़े देवें , भैणा नू  वीर मिले ,

जेहड़ा दर तेरे आवे, आंसा दे फूल खिले | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

खेनू गुड़िया लै के संगत दर आवे ,

कर देवे तू कृपा झोलियाँ भर जावे | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

द्वार तेरे दे चेले चौंकियाँ ने भरदे ,

नाम तेरे नू  जप के पापी ने हरदे | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

इस कलियग दे अंदर हे अवतार तेरा ,

हर इक जीव ते बावा ,हर इक जीव ते बुआ है उपकार तेरा | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

धूड़ तेरे चरणा दी झोली विच पावां ,

नाम दा अमृत पि के तेरा यश गावां | 

श्री जय बुआ बावा , 


धुप दीप तेरी आरती, चंदन तिलक लगे,

पुष्पां दी गल माला खिचड़ी भोग लगे | 

श्री जय बुआ बावा , 


हथ जोड़ के अरजां जग सारा करदा ,

साथी सेवक दरदा उपमा है करदा | 

श्री जय बुआ बावा , 


श्री जय बुआ बावा , श्री जय बुआ बावा ,

निस दिन जोट जगाके , तैनू में ध्यावाँ ,

श्री जय बुआ बावा |

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Jaharveer Goga Ji Aarti

goga jahaveer arti
Goga jahaveer ji

जय जय जाहरवीर हरे जय जय गूगा वीर हरे

धरती पर आ करके भक्तों के दुख दूर करे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।


जो कोई भक्ति करे प्रेम से हाँ जी करे प्रेम से

भागे दुख परे विघन हरे, मंगल के दाता तन का कष्ट हरे ।जय जय जाहरवीर हरे  ।।


जेवर राव के पुत्र कहाये रानी बाछल माता

बागड़ जन्म लिया वीर ने जय-जयकार करे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।


धर्म की बेल बढ़ाई निश दिन तपस्या रोज करे

दुष्ट जनों को दण्ड दिया जग में रहे आप खरे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।


सत्य अहिंसा का व्रत धारा झूठ से आप डरे

वचन भंग को बुरा समझकर घर से आप निकरे ।।जय जय जाहरवीर हरे  ।।


माड़ी में तुम करी तपस्या अचरज सभी करे

चारों दिशा में भक्त आ रहे आशा लिए उतरे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।


भवन पधारो अटल क्षत्र कह भक्तों की सेवा करे

प्रेम से सेवा करे जो कोई धन के भण्डार भरे ।। जय जय जाहरवीर हरे ।।


तन मन धन अर्पण करके भक्ति प्राप्त करे

भादों कृष्ण नौमी के दिन पूजन भक्ति करे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।


जय जय जाहरवीर हरे जय जय गूगा वीर हरे

धरती पर आ करके भक्तों के दुख दूर करे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।

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बुआ बाबा जी आरती

गुरुवार, 21 जुलाई 2022

मां दुर्गा जी की आरती : जय अम्बे गौरी | DURGA AARTI

maa durga aarti
माँ दुर्गा 

जय अम्बे गौरी,

मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत,

हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


मांग सिंदूर विराजत,

टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना,

चंद्रवदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


कनक समान कलेवर,

रक्ताम्बर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला,

कंठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


केहरि वाहन राजत,

खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत,

तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


कानन कुण्डल शोभित,

नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर,

सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


शुंभ-निशुंभ बिदारे,

महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना,

निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


चण्ड-मुण्ड संहारे,

शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे,

सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


ब्रह्माणी, रूद्राणी,

तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी,

तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


चौंसठ योगिनी मंगल गावत,

नृत्य करत भैरों ।

बाजत ताल मृदंगा,

अरू बाजत डमरू ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


तुम ही जग की माता,

तुम ही हो भरता,

भक्तन की दुख हरता ।

सुख संपति करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


भुजा चार अति शोभित,

वर मुद्रा धारी । [खड्ग खप्पर धारी]

मनवांछित फल पावत,

सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


कंचन थाल विराजत,

अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत,

कोटि रतन ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


श्री अंबेजी की आरति,

जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी,

सुख-संपति पावे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


जय अम्बे गौरी,

मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत,

हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

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GANESH AARTI | जय गणेश जी की आरती

ganesh aarti
श्री गणेश 

 जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


एक दंत दयावंत,

चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे,

मूसे की सवारी ॥


जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


पान चढ़े फल चढ़े,

और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे,

संत करें सेवा ॥


जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


अंधन को आंख देत,

कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत,

निर्धन को माया ॥


जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


'सूर' श्याम शरण आए,

सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


दीनन की लाज रखो,

शंभु सुतकारी ।

कामना को पूर्ण करो,

जाऊं बलिहारी ॥


जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


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