रविवार, 25 सितंबर 2022

माँ ब्रह्मचरणी कथा | maa brahcharni katha

maa brahmcharni katha

 माँ ब्रह्मचरणी कथा 


माता ब्रहमचरणी ने हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया उनकी माता का नाम नैना था।  जब वह युवा अवस्था में आयी तो नारद जी उपदेश से वह भगवान शिव को मन ही मन में अपने पति मान चुकी थी और उन्हें पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या करने लगी उन्होंने कई वर्ष तक सिर्फ फल पत्ते फूल खाकर कड़ी तपस्या तपस्या में लीन रही। वह तपस्या में इतनी लीन रहने लगी की उन्होंने फूल पत्ते भी खाना छोड़ दिया इस लिए उन्हें अपर्णा भी कहते है। माता की इतनी घोर तपस्या से उनकी माता नैना बहुत परेशान होने लगी और उन्हें जंगल उमा कहकर  में ढूंढने लगी  तब से उन्हें उमा के नाम से भी जाना जाता है।  

    माँ की ऐसी घोर तपस्या के बारे में समस्त संसार देव गण में सराहना करते हुए कहने लगे , की हे माँ ऐसी घोर तपस्या संसार में कोई नहीं कर सकता आपके सिवा। तब ब्रह्मा जी ने आकाशवाणी के द्वारा सम्बोधित करते हुए कहाँ- हे देवी ! आज तुम्हारी इस कठिन तपस्या से भगवान शिव तुम्हे पति के रूप में जरूर प्राप्त होंगे।  तद  पश्चात् पार्वती माता अपने घर चली गयी और उनके पिता ने उनका विवाह भगवान भोलेनाथ से कर दिया।  


                                                  *--------------- जय माता दी ---------------*

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