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गुरुवार, 28 जुलाई 2022

Kaali mata aarti | काली माता आरती

kaali mata aarti
काली माता 


अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली ।

तेरे ही गुण गाये भारती

,

ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


तेरे भक्त जनो पे माता ,

भीर पडी है  ।

दानव दल पर टूट पडो,

माँ करके सिंह सवारी ।


सौ-सौ सिंहो से भी बलशाली,

हे अष्ट भुजाओ वाली,

दुष्टो को पलमे संहारती ।


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली ।

तेरे ही गुण गाये भारती,


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


माँ बेटे का है इस जग मे,

बडा ही निर्मल नाता ।


पूत - कपूत सुने है पर न,

माता सुनी कुमाता ॥

सब पे करूणा दरशाने वाली,

अमृत बरसाने वाली,

दुखियो के दुखडे निवारती ।


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली ।

तेरे ही गुण गाये भारती,


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


नही मांगते धन और दौलत,

न चांदी न सोना ।

हम तो मांगे माँ तेरे मन मे,

इक छोटा सा कोना ॥


सबकी बिगडी बनाने वाली,

लाज बचाने वाली,

सतियो के सत को सवांरती ।


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली ।

तेरे ही गुण गाये भारती,


ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥


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