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शनिवार, 30 जुलाई 2022

shri krishan aarti | आरती कुञ्ज बिहारी की

 

shri krishan aarti
श्री कृष्ण 

आरती कुंज बिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


गले में बैजंती माला,

बजावे मुरली मधुर बाला,

श्रवण में कुंडल झलकाला,

नन्द के आनंद नन्दलाला,

गगन सम अंग कांति काली,

राधिका चमक रही आली,

लटन में ठाढ़े बनमाली,

भ्रमर सो अलक, कस्तूरी तिलक,

चन्द्र सी झलक,

ललित छवि श्यामा प्यारी की,

श्रीगिरीधर कृष्ण मुरारी की,


आरती कुंज बिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, 


कनकमय मोर मुकुट बिलसे,

देवता दर्शन को तरसे,

गगन सो सुमन रासी बरसे,


बजे मुरचंग,

मधुर मिरदंग,

ग्वालिन संग,


अतुल रति गोप कुमारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


आरती कुंज बिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


जहाँ ते प्रकट भई गंगा,

सकल मल हरिणी श्री गंगा,

स्मरण से होत मोह भंगा,

बसी शिव शीष, जटा के बीच,

हरे अघ कीच,


चरण छवि श्री बनवारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, ,


आरती कुंज बिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


चमकती उज्जवल तट रेणु,

बज रही वृन्दावन बेणु,

चहूँ दिशी गोपी ग्वाल धेनु,


हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटक भव फंद,


टेर सुन दीन भिखारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


आरती कुंज बिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,


*--------------------जय श्री कृष्ण -------------------*

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