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| शिव पार्वती |
हरियाली तीज की पौराणिक व्रत कथा :-
एक समय की बात है जब माता पार्वती अपने पूर्वजन्म के बारे में याद करना चाहती थीं लेकिन उन्हें कुछ याद नहीं आ रहा था। ऐसे में भोलेनाथ देवी पार्वती से कहते है की हे पार्वती तुमने मुझे प्राप्त करने के लिए 107 बार जन्म लिया था लेकिन तुम मुझे पति के रूप में पा न सकी। पर 108 वे जन्म में पर्वतराज हिमालय और मेना के घर जन्म लिया और मुझे वर रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की।
भगवान शिव ने आगे बताया की हे पार्वती ! तुमने मुझे पाने के लिए घोर तपस्या की अन्न -जल का त्यागकर पत्ते खाए और सर्दी -गर्मी हर वातावरण में हजारों कष्टों को सहकर भी अपने व्रत का पालन किया। तुम्हारे कष्टों को देखकर तुम्हारे पिताजी बहुत दुखी थे, तब नारद मुनि तुम्हारे घर पधारे और कहाँ की मुझे भगवान विष्णु ने भेजा है। भगवान विष्णु आपकी कन्या से अत्यंत प्रसन्न है तथा वह उनसे विवाह करना चाहते है, और में भगवान विष्णु जी का यही सन्देश लेकर आपके पास आया हूँ।
नारदजी के प्रस्ताव को सुनकर पार्वती के पिता ख़ुशी से भगवान विष्णु के साथ विवाह के लिए तैयार हो गए। नारदमुनि ने भी भगवान विष्णु को यह शुभ सन्देश सुना दिया। लेकिन जब यह बात पार्वती को पता चली तब वह बहुत दुखी हुई। पार्वती ने अपने मन की बात अपनी सखी को सुनाई। तब सखी ने माता पार्वती को घने जंगल में छुपा दिया और माता पार्वती जंगल में एक गुफा में रेत से शिवलिंग बनाकर शिवजी की पूजा कर रही थी। जब पार्वती के गायब होने की खबर हिमालय को पता चली तब उन्होंने उन्हें चारों और ढूंढने लगे।
तब शिवजी ने कहा , पार्वती ! इस प्रकार तुम्हारी पूजा से में बहुत प्रसन्न हुआ और तुम्हारी मनोकामना पूरी की। जब हिमालयराज गुफा में पहुंचे तब तुमने अपने पिता को बताया की मैंने शिवजी को पतिरूप में चयन कर लिया है। में आपके साथ केवल एक शर्त पर चलूंगी की आप मेरा विवाह भोलेनाथ से करवाने के लिए तैयार हो जाएँ। तब हे पार्वती ! तुम्हारे पिताजी मान गए और विधि विधान सहित हमारा विवाह हुआ। हे पार्वती ! तुम्हारे कठोर तप और व्रत से ही हमारा विवाह हो सका।
भगवान शिव देवी पार्वती से कहते है , हे पार्वती इस हरियाली तीज को जो भी निष्ठां के साथ व्रत करेगा , में उसको मनोवांछित फल प्रदान करूँगा। उसे तुम जैसा अचल सुहाग का वरतदान प्राप्त हो।
हरियाली तीज पूजा विधि :
हरियाली तीज के दिन विवाहित स्त्रियां अपने दीर्घायु के लिए व्रत रखती है। इस के मायके से शृंगार का सामान और मिठाइयां भेजी जाती है। हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह घर के काम और स्न्नान करने के बाद सोलह शृंगार करके निर्जला व्रत रखती है। इसके बाद माँ पार्वती और भगवान शिव की पूजा होती है।
पूजा के अंत में तीज की कथा सुनी जाती है। कथा के समापन पर महिलाए माँ गोरी से पति की लम्बी उम्र की कामना करती है। इसके बाद घर में उत्स्व मनाया जाता है और भजन व् लोक नृत्य किये जाते है। इस दिन हरे वस्त्र , हरी चुनरी , हरा लहरिया , हरा श्रृंगार , मेहँदी , झूला - झूलने का भी चलन है।
*----------------------------------जय माता पार्वती -----------------------------*
