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शनिवार, 23 जुलाई 2022

Vishwakarma aarti | विश्वकर्मा आरती

vishvkarma aati
श्री विश्वकर्मा

 जय श्री विश्वकर्मा ,

प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

सकल सृष्टि के करता,

रक्षक स्तुति धर्मा ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


आदि सृष्टि मे विधि को,

श्रुति उपदेश दिया ।

जीव मात्र का जग में,

ज्ञान विकास किया ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


ऋषि अंगीरा तप से,

शांति नहीं पाई ।

ध्यान किया जब प्रभु का,

सकल सिद्धि आई ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


रोग ग्रस्त राजा ने,

जब आश्रय लीना ।

संकट मोचन बनकर,

दूर दुःखा कीना ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


जब रथकार दंपति,

तुम्हारी टेर करी ।

सुनकर दीन प्रार्थना,

विपत सगरी हरी ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


एकानन चतुरानन,

पंचानन राजे।

त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,

सकल रूप साजे ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


ध्यान धरे तब पद का,

सकल सिद्धि आवे ।

मन द्विविधा मिट जावे,

अटल शक्ति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा ।


श्री विश्वकर्मा की आरती,

जो कोई गावे ।

भजत गजानांद स्वामी,

सुख संपति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा ,


प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

सकल सृष्टि के करता,

रक्षक स्तुति धर्मा ॥

जय श्री विश्वकर्मा ||


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