शुक्रवार, 22 जुलाई 2022

भगवान शिव की आरती | Shiv aarti

 

shiv aarti
ॐ नमः शिवाय 

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। 

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

ओम जय शिव ओंकारा॥



एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। 

हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥




दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। 

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी। 

त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे। 

सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी। 

सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। 

मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा। 

पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा। 

भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥

ओम जय शिव ओंकारा॥



जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला। 

शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी। 

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे। 

कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥


ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। 

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

ओम जय शिव ओंकारा॥

                                        
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shanidev aarti| शनिदेव आरती

शनिदेव आरती
शनिदेव


 जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥

॥ जय जय श्री शनिदेव..॥


श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।

नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥

॥ जय जय श्री शनिदेव..॥


क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।

मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥

॥ जय जय श्री शनिदेव..॥


मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥

॥ जय जय श्री शनिदेव..॥


देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी ।

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥

॥ जय जय श्री शनिदेव..॥


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Surya Dev Aarti | सूर्य देव आरती

SURYA DEV AARTI
सूर्य देव 

 ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।



सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।

अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।


ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।

फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।


संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।

गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।



देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।

स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।


तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।

प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।


भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।

वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।



पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।

ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।


ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।

धरत सब ही तव ध्यान, 

ॐ जय सूर्य भगवान।।


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Bua Baba ji ki aarti , बुआ बावा जी की आरती

Jhiri mela
बाबा जीतमल जी बुआ कौड़ी जी 


 श्री जय बुआ बावा , श्री जय बुआ बावा ,

निस दिन जोत जगाके , तैनू में ध्यावाँ ,

श्री जय बुआ बावा ,


विच झिड़ी अस्थान है तेरा मेला लगे भारी ,

दर्शन लई  ओथे जांदे लखां नर -नारी | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

कर इशनान तला विच , कष्ट मिटे सारा ,

तेरे तलाब दी महिमा , जाणे जग सारा | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

भुत  चुड़ैल वि तैथों मंगदे ने छुटकारा,

माफ़ करीं  सानू बावा , माफ़ करी सानू बुआ चलदा नहीं चारा | 

श्री जय बुआ बावा , 


कोड़ी नू  देवें काया निर्धन नू  माया ,

अनेयां नू देवें अखियां , गूंगेयां यश गया | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

मवाँ नू बचड़े देवें , भैणा नू  वीर मिले ,

जेहड़ा दर तेरे आवे, आंसा दे फूल खिले | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

खेनू गुड़िया लै के संगत दर आवे ,

कर देवे तू कृपा झोलियाँ भर जावे | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

द्वार तेरे दे चेले चौंकियाँ ने भरदे ,

नाम तेरे नू  जप के पापी ने हरदे | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

इस कलियग दे अंदर हे अवतार तेरा ,

हर इक जीव ते बावा ,हर इक जीव ते बुआ है उपकार तेरा | 

श्री जय बुआ बावा ,

 

धूड़ तेरे चरणा दी झोली विच पावां ,

नाम दा अमृत पि के तेरा यश गावां | 

श्री जय बुआ बावा , 


धुप दीप तेरी आरती, चंदन तिलक लगे,

पुष्पां दी गल माला खिचड़ी भोग लगे | 

श्री जय बुआ बावा , 


हथ जोड़ के अरजां जग सारा करदा ,

साथी सेवक दरदा उपमा है करदा | 

श्री जय बुआ बावा , 


श्री जय बुआ बावा , श्री जय बुआ बावा ,

निस दिन जोट जगाके , तैनू में ध्यावाँ ,

श्री जय बुआ बावा |

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Jaharveer Goga Ji Aarti

goga jahaveer arti
Goga jahaveer ji

जय जय जाहरवीर हरे जय जय गूगा वीर हरे

धरती पर आ करके भक्तों के दुख दूर करे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।


जो कोई भक्ति करे प्रेम से हाँ जी करे प्रेम से

भागे दुख परे विघन हरे, मंगल के दाता तन का कष्ट हरे ।जय जय जाहरवीर हरे  ।।


जेवर राव के पुत्र कहाये रानी बाछल माता

बागड़ जन्म लिया वीर ने जय-जयकार करे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।


धर्म की बेल बढ़ाई निश दिन तपस्या रोज करे

दुष्ट जनों को दण्ड दिया जग में रहे आप खरे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।


सत्य अहिंसा का व्रत धारा झूठ से आप डरे

वचन भंग को बुरा समझकर घर से आप निकरे ।।जय जय जाहरवीर हरे  ।।


माड़ी में तुम करी तपस्या अचरज सभी करे

चारों दिशा में भक्त आ रहे आशा लिए उतरे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।


भवन पधारो अटल क्षत्र कह भक्तों की सेवा करे

प्रेम से सेवा करे जो कोई धन के भण्डार भरे ।। जय जय जाहरवीर हरे ।।


तन मन धन अर्पण करके भक्ति प्राप्त करे

भादों कृष्ण नौमी के दिन पूजन भक्ति करे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।


जय जय जाहरवीर हरे जय जय गूगा वीर हरे

धरती पर आ करके भक्तों के दुख दूर करे ।। जय जय जाहरवीर हरे  ।।

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बुआ बाबा जी आरती

गुरुवार, 21 जुलाई 2022

मां दुर्गा जी की आरती : जय अम्बे गौरी | DURGA AARTI

maa durga aarti
माँ दुर्गा 

जय अम्बे गौरी,

मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत,

हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


मांग सिंदूर विराजत,

टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना,

चंद्रवदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


कनक समान कलेवर,

रक्ताम्बर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला,

कंठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


केहरि वाहन राजत,

खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत,

तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


कानन कुण्डल शोभित,

नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर,

सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


शुंभ-निशुंभ बिदारे,

महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना,

निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


चण्ड-मुण्ड संहारे,

शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे,

सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


ब्रह्माणी, रूद्राणी,

तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी,

तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


चौंसठ योगिनी मंगल गावत,

नृत्य करत भैरों ।

बाजत ताल मृदंगा,

अरू बाजत डमरू ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


तुम ही जग की माता,

तुम ही हो भरता,

भक्तन की दुख हरता ।

सुख संपति करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


भुजा चार अति शोभित,

वर मुद्रा धारी । [खड्ग खप्पर धारी]

मनवांछित फल पावत,

सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


कंचन थाल विराजत,

अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत,

कोटि रतन ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


श्री अंबेजी की आरति,

जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी,

सुख-संपति पावे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


जय अम्बे गौरी,

मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत,

हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

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GANESH AARTI | जय गणेश जी की आरती

ganesh aarti
श्री गणेश 

 जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


एक दंत दयावंत,

चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे,

मूसे की सवारी ॥


जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


पान चढ़े फल चढ़े,

और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे,

संत करें सेवा ॥


जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


अंधन को आंख देत,

कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत,

निर्धन को माया ॥


जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


'सूर' श्याम शरण आए,

सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


दीनन की लाज रखो,

शंभु सुतकारी ।

कामना को पूर्ण करो,

जाऊं बलिहारी ॥


जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥


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LAKSHI JI KI AARTI | लक्ष्मी जी की आरती

lakshmi aarti
माँ लक्ष्मी 

 ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुम को निस दिन सेवत, मैयाजी को निस दिन सेवत हरि विष्णु विधाता।।

ऊं जय लक्ष्मी माता 


उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता

ऊं मैया तुम ही जग माता।

सूर्य चन्द्र मां ध्यावत, नारद ऋषि गाता।।

ऊं जय लक्ष्मी माता 


दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता

ऊं मैया सुख सम्पति दाता।

जो कोई तुम को ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता।।

ऊं जय लक्ष्मी माता 


तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता

ओ मैया तुम ही शुभ दाता।

कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भव निधि की दाता

ऊं जय लक्ष्मी माता 


जिस घर तुम रहती तह सब सद्गुण आता

ऊं मैया सब सद्गुण आता।

सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।।

ऊं जय लक्ष्मी माता 


तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता

ऊं मैया वस्त्र न कोई पाता।

ख़ान पान का वैभव, सब तुम से आता

ऊं जय लक्ष्मी माता


शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता

ऊं मैया क्षीरोदधि जाता।

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता

ऊं जय लक्ष्मी माता


महा लक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।

ऊं मैया जो कोई जन गाता।

उर आनंद समाता, पाप उतर जाता

ऊं जय लक्ष्मी माता


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Om Jai Jagdish Aarti | ॐ जय जगदीश हरे आरती

om jai jagdish hare
ब्रह्मा विष्णु महेश 

 ॐ जय जगदीश हरे

स्वामी जय जगदीश हरे

भक्त जनों के संकट

दास जनों के संकट

क्षण में दूर करे

ॐ जय जगदीश हरे


जो ध्यावे फल पावे

दुख बिनसे मन का

स्वामी दुख बिनसे मन का

सुख संपत्ती घर आवे

सुख संपत्ती घर आवे

कष्ट मिटे तन का

ॐ जय जगदीश हरे


मात पिता तुम मेरे

शरण गहूँ मैं किसकी

स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी

तुम बिन और न दूजा

तुम बिन और न दूजा

आस करूँ मैं किसकी

ॐ जय जगदीश हरे


तुम पूरण परमात्मा

तुम अंतर्यामी

स्वामी तुम अंतर्यामी

पारब्रह्म परमेश्वर

पारब्रह्म परमेश्वर

तुम सब के स्वामी

ॐ जय जगदीश हरे


तुम करुणा के सागर

तुम पालनकर्ता

स्वामी तुम पालनकर्ता

मैं मूरख खल कामी

मैं सेवक तुम स्वामी

कृपा करो भर्ता

ॐ जय जगदीश हरे


तुम हो एक अगोचर

सबके प्राणपति

स्वामी सबके प्राणपति

किस विधि मिलूँ दयामय

किस विधि मिलूँ दयामय

तुमको मैं कुमति

ॐ जय जगदीश हरे


दीनबंधु दुखहर्ता

ठाकुर तुम मेरे,

स्वामी ठाकुर तुम मेरे

अपने हाथ उठाओ,

अपने शरण लगाओ

द्वार पड़ा तेरे |

ॐ जय जगदीश हरे


विषय विकार मिटाओ

पाप हरो देवा

स्वमी पाप हरो देवा

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ

संतन की सेवा

ॐ जय जगदीश हरे


तन मन धन

सब कुछ है तेरा

स्वामी सब कुछ है तेरा

तेरा तुझ को अर्पण

तेरा तुझ को अर्पण

क्या लागे मेरा

ॐ जय जगदीश हरे


ॐ जय जगदीश हरे

स्वामी जय जगदीश हरे

भक्त जनों के संकट

दास जनों के संकट

क्षण में दूर करे

ॐ जय जगदीश हरे

                

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हनुमान जी की आरती | hanuman ji ki aarti

hanuman aarti
जय बजरंग बलि 

 ॥ आरती ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥


जाके बल से गिरवर काँपे ।

रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई ।

संतन के प्रभु सदा सहाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥


दे वीरा रघुनाथ पठाए ।

लंका जारि सिया सुधि लाये ॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।

जात पवनसुत बार न लाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥


लंका जारि असुर संहारे ।

सियाराम जी के काज सँवारे ॥

लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।

लाये संजिवन प्राण उबारे ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥


पैठि पताल तोरि जमकारे ।

अहिरावण की भुजा उखारे ॥

बाईं भुजा असुर दल मारे ।

दाहिने भुजा संतजन तारे ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥


सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें ।

जय जय जय हनुमान उचारें ॥

कंचन थार कपूर लौ छाई ।

आरती करत अंजना माई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥


जो हनुमानजी की आरती गावे ।

बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥

लंक विध्वंस किये रघुराई ।

तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥


आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥


॥ इति संपूर्णंम् ॥


      -----------*जय श्री राम *-----------


Hanuman Chalisa

बुधवार, 20 जुलाई 2022

Hanuman Chalisa | हनुमान चालीसा

hanuman chalisa
जय बजरंग बलि



दोहा 

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श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सूधारि।

बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥


बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥


चोपाई 

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जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ १ ॥


राम दूत अतुलित बल धामा।

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥ २ ॥


महावीर विक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी॥ ३ ॥


कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कानन कुंडल कुंचित केसा॥ ४ ॥


हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।

काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ ५ ॥


शंकर सुवन केसरी नंदन।

तेज प्रताप महा जग बंदन॥ ६ ॥


विद्यावान गुणी अति चातुर।

राम काज करिबे को आतुर॥ ७ ॥


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

राम लखन सीता मन बसिया॥ ८ ॥


सूक्ष्म रूप धरी सियहिं दिखावा।

विकट रूप धरि लंक जरावा॥ ९ ॥


भीम रूप धरि असुर सँहारे।

रामचन्द्र के काज सँवारे॥ १० ॥


लाय सँजीवनि लखन जियाए।

श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥ ११ ॥


रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ १२ ॥


सहस बदन तुम्हरो यश गावैं।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ १३ ॥


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।

नारद सारद सहित अहीसा॥ १४ ॥


यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।

कबी कोबिद कहि सकैं कहाँ ते॥ १५ ॥


तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।

राम मिलाय राजपद दीन्हा॥ १६ ॥


तुम्हरो मन्त्र बिभीषण माना।

लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ १७ ॥


जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ १८ ॥


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥ १९ ॥


दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ २० ॥


राम दुआरे तुम रखवारे।

होत न आज्ञा बिन पैसारे॥ २१ ॥


सब सुख लहै तुम्हारी शरना।

तुम रक्षक काहू को डरना॥ २२ ॥


आपन तेज सम्हारो आपै।

तीनौं लोक हाँक ते काँपे॥ २३ ॥


भूत पिशाच निकट नहिं आवै।

महाबीर जब नाम सुनावै॥ २४ ॥


नासै रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ २५ ॥


संकट तें हनुमान छुड़ावै।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ २६ ॥


सब पर राम तपस्वी राजा।

तिन के काज सकल तुम साजा॥ २७ ॥


और मनोरथ जो कोई लावै।

सोहि अमित जीवन फल पावै॥ २८ ॥


चारों जुग परताप तुम्हारा।

है परसिद्ध जगत उजियारा॥ २९ ॥


साधु संत के तुम रखवारे।

असुर निकंदन राम दुलारे॥ ३० ॥


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।

अस वर दीन्ह जानकी माता॥ ३१ ॥


राम रसायन तुम्हरे पासा।

सदा रहो रघुपति के दासा॥ ३२ ॥


तुम्हरे भजन राम को पावै।

जनम जनम के दुख बिसरावै॥ ३३ ॥


अंत काल रघुबर पुर जाई।

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥ ३४ ॥


और देवता चित्त न धरई।

हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ ३५ ॥


संकट कटै मिटै सब पीरा।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ ३६ ॥


जय जय जय हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ ३७ ॥


जो शत बार पाठ कर कोई।

छूटहि बंदि महा सुख होई॥ ३८ ॥


जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।

होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ ३९ ॥


तुलसीदास सदा हरि चेरा।

कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ ४० ॥


दोहा 

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पवनतनय संकट हरण मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥


----------* जय श्री राम *-----------

बृहस्पतिवार व्रत कथा

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